स्टेच्यू ऑफ यूनिटी – लोकार्पण कार्यक्रम

अहमदाबाद में सिन्धी समाज का 11वां सामूहिक विवाह सम्मेलन
October 25, 2018

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी – लोकार्पण कार्यक्रम

Statue of Unity
२९ राज्यों एवं २ केंद्रशासित प्रदेशों के कलाकार देंगे रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुत

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सशस्त्र एवं अर्धसैनिक बलों तथा राज्य पुलिस द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन

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• प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सहित महानुभावों का पुलिस बिगुलरों द्वारा वेलकम बैंड से किया जाएगा स्वागत
• २९ राज्य व २ केंद्रशासित प्रदेशों के श्रेष्ठ सांस्कृतिक वृंद प्रस्तुत करेंगे अपनी कला विरासत
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भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की केवड़िया में निर्मित १८२ मीटर ऊंचाई की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ३१ अक्टूबर को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर देश के २९ राज्यों एवं २ केंद्रशासित प्रदेशों के कलाकारों द्वारा रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही सशस्त्र एवं अर्धसैनिक बलों तथा राज्य पुलिस द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।

सरदार पटेल की जयंती को केवड़िया कॉलोनी, नर्मदा में उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। यहां आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत भारत की आंतरिक एवं सरहदों की सुरक्षा का दायित्व अपने कंधों पर उठाने वाले गुजरात पुलिस बल, एसआरपीएफ, सीआरपीएफ, सेना, नौसेना और वायुसेना के ७ कमर्शियल बैंड द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा, जब प्रधानमंत्री 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' का लोकार्पण करने को आगे बढ़ेंगे तब महानुभावों के साथ उनका देश के २९ राज्यों एवं २ केंद्रशासित प्रदेशों के श्रेष्ठ सांस्कृतिक वृंद अपनी सांस्कृतिक धरोहर की प्रस्तुति के जरिए स्वागत करेंगे। सर्वप्रथम गुजरात पुलिस के बिगुल वादकों द्वारा महानुभावों का वेलकम बैंड से स्वागत किया जाएगा। इसके बाद माननीय प्रधानमंत्री के द्वारा 'वॉल ऑफ यूनिटी' का लोकार्पण करेंगे। तत्पश्चात समग्र देश से आए सांस्कृतिक समूह एक के बाद एक प्रस्तुति देंगे।

इसमें केरल का पंचवाघम, तमिलनाडु का दमी होर्स, कारागम, कावड़ी और आंध्र प्रदेश का गरागुलु, पुड्डुचेरी का केलीअट्टम, कर्नाटक का लेडीज, ढोलुकुनिठा (कोरबा के भरवाड़ समाज के पुरुषों का ढोल के साथ वीर रस को दर्शाता नृत्य), तेलंगाना का मथुरी नृत्य, छत्तीसगढ़ का पंथी नृत्य, दमण का मच्छी नृत्य जिसमें मछुआरे समुद्र से लौटते वक्त अपने आनंद-उल्लास को प्रगट करते हैं, अरूणाचल प्रदेश का रिख्खमपड़, आसाम का बीहू नृत्य (इसमें वसंत के आगमन के स्वागत और मानवीय प्रेम को दर्शाया जाता है), मेघालय का वांगला, मिजोरम का चेरो नृत्य (इस नृत्य में बांस का उपयोग होता है इसलिए इसे बांबू डांस कहते हैं। बांस को आड़ा और समानांतर रखकर दोनों सिरों से अलग-अलग व्यक्ति इसे पकड़ते हैं और लयबद्ध तरीके से टकराकर ताली नृत्य करते हैं), नागालैंड का मकुहेनगिची (वॉर डांस), त्रिपुरा का होजागिरी, सिक्कीम का संगहिचाम, पंजाब का भांगड़ा, जम्मू-कश्मीर का रौफ नृत्य, हिमाचल प्रदेश का हिमाचली नटी, झारखंड का पैका नृत्य, बिहार का होली और जली जला, ओडिशा का गोटीपुआ (देवदासी और महारी प्रथा समाप्त होने के बाद नर्तकों द्वारा यह ओडिशी नृत्य प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें अंग कसरत और व्यायाम के विभिन्न आसनों का भी समावेश होता है), हरियाणा का घूमर (होली, गणगौर पूजा एवं तीज जैसे त्यौहारों में स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला परंपरागत नृत्य), मध्य प्रदेश का बधाई नृत्य, उत्तराखंड का छापेली, राजस्थान का लांगा घेर नृत्य (होली के समय खेला जाता है। पैरों में घूंघरी, साफे के साथ ढोल और थाली पर युद्ध कला की प्रस्तुति नृत्य द्वारा की जाती है), मणिपुर का ढोल, ढोलक और चोलम नृत्य (इसमें तलवार और भाले से युद्ध कला का प्रदर्शन नृत्य द्वारा किया जाता है), गुजरात का सिदी धमाल नृत्य, गोवा का मूसल खेल, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का मयूर नृत्य एवं पुरलिया, गुजरात का बाराती ढोल (गुजरात के लोक वाद्य व ढोल की प्रस्तुति), महाराष्ट्र का सांगी मुखौटा, गुजरात के डांगी वाद्य (डांग क्षेत्र के आदिवासी लोगों द्वारा लोक वाद्यों की प्रस्तुति), गुजरात का राठवा नृत्य (यह आदिवासी लोक नृत्य होली और विवाह अवसर पर प्रस्तुत किया जाता है। इसमें बड़े ढोल और बांसुरी का उपयोग कर स्त्री-पुरुष परंपरागत वेशभूषा में नृत्य की प्रस्तुति करते हैं। इसको यूनेस्को द्वारा हेरिटेज नृत्य घोषित किया गया है) देश के हर हिस्से की अनूठी नृत्य कला सभी महानुभावों का मन मोह लेगी। राज्यों की सांस्कृतिक धरोहर समान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के बाद माननीय प्रधानमंत्री स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की तरफ आगे बढ़ेंगे तब भारत देश की आन-बान और शान समान पुलिस बल और सीमाओं की सुरक्षा करने वाले सशस्त्र बलों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें गुजरात पुलिस बल द्वारा वंदेमातरम, एसआरपीएफ द्वारा ऐ मेरे वतन के लोगों, सीआरपीएफ द्वारा देशों का सरताज भारत, बीएसएफ द्वारा मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरा ये वतन, थल सेना द्वारा कदम कदम बढ़ाए जा, नौसेना द्वारा बीट नंबर-१ और वायुसेना द्वारा सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा जैसे गीतों की प्रस्तुति के जरिए माहौल को राष्ट्रभक्ति के रस से सराबोर किया जाएगा।

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