पुलिस, फॉरेंसिक साइंस और न्यायतंत्र में गुजरात ने श्रेष्ठ कार्य किया

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पुलिस, फॉरेंसिक साइंस और न्यायतंत्र में गुजरात ने श्रेष्ठ कार्य किया

pm modi in forensic university inauguration

पुलिस, फॉरेंसिक साइंस और न्यायतंत्र के मजबूतीकरण से आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करने में गुजरात ने श्रेष्ठ कार्य किया: प्रधानमंत्री श्री मोदी   

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मानवीय सूझबूझ और परम्परागत ज्ञान को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर फॉरेंसिक साइंस क्षेत्र में नये आयाम हासिल करने का पीएम का अनुरोध 

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गुजरात में फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी को 300 करोड़ के खर्च से सेंटर ऑफ एक्सलेंस बनाने की घोषणा: केन्द्र सरकार देगी 60 फीसदी राशि

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फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी के चौथे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री ओपी कोहली, मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी की उपस्थिति में विद्यार्थियों को प्रदान की गई डिग्रियां   

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि पुलिस, फॉरेंसिक साइंस और न्यायतंत्र के मजबूतीकरण से आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित कर नागरिक सुरक्षा को ज्यादा सुदृढ़ किया जा सकता है। गुजरात ने इन तीनों स्तंभों को ध्यान में रखकर रक्षाशक्ति युनिवर्सिटी, नेशनल लॉ युनिवर्सिटी और फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी की स्थापना कर आंतरिक सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाकर अपराधों को नियंत्रित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

गांधीनगर में गुजरात फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी के चौथे दीक्षांत समारोह में श्री मोदी ने मानवीय सूझबूझ- ह्यूमन इंटेलिजेंस और परम्परागत ज्ञान को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर साइंस क्षेत्र में नये आयाम हासिल करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि गुजरात फॉरेंसिक साइंसिस युनिवर्सिटी ने वैज्ञानिक अभिगम से अंतरराष्ट्रीय स्तर का मानव संसाधन तैयार कर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है। स्थापना के पांच वर्ष में ही इस युनिवर्सिटी ने 6000 जितने अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है। करीब 28 देशों के 700 से अधिक पुलिस अधिकारी गुजरात में तालीम लेकर गए हैं। गुजरात फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी तालीम और वैश्विक सलामती निर्णायक भूमिका निभा रही है जो प्रत्येक गुजरातियों के लिए गौरव की बात है।

डिजिटल टेक्नोलॉजी ने फॉरेंसिक साइंस को नयी ताकत प्रदान की है। इसका उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंटरनेट के कारण जीवन आसान हुआ है परंतु साथ ही, सायबर अपराध भी बढ़े हैं। लोगों की प्राइवसी के समक्ष भी खतरे खड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने भी खतरा पैदा हुआ है, ऐसे में सायबर- डिजिटल विशेषज्ञ देश और मानवजाति को सुरक्षित और सशक्त बनाने में सहायक हों, यह जरूरी है। सायबर क्राइम के अपराधियों में भय पैदा हो, ऐसे कदम के तौर पर अनुभवी विशेषज्ञों की आवश्यकता है। बदलते समय के साथ मात्र अपराध ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी फॉरेंसिक साइंस का महत्व बढ़ा है।

गुजरात और राजस्थान में पगी समुदाय की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि पगी समुदाय वर्षों से मानवीय अंतर्सूझबूझ के लिए जाना जाता है। ऊंट के पदचिन्हों पर से वह कह सकते हैं कि ऊंट अकेला था, उस पर सामान था या नहीं, अगर था तो कितना था? इस तरह की आंतरिक सूझबूझ को तालीम की आवश्यकता है। फिंगरप्रिंट, हस्ताक्षर और मनोविश्लेषण के पारम्परिक ज्ञान को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर नये आयाम हासिल करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने डीएमए एनालिसिस को आज के आधुनिक फॉरेंसिक साइंस में महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि डीएनए प्रोफाइल ने अपराधों की जांच और निराकरण की नयी दिशा अपनायी है। इतना ही नहीं, न्याय प्रणाली को ज्यादा तेज बनाया है, जिसके चलते लोगों को तेजी से न्याय मिल रहा है। इस क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा डीएनए टेक्नोलॉजी यूज़ एंड एप्लिकेशन बिल लाया गया है।

सरकार देश के तमाम राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में डीएनए लेबोरेटरी की स्थापना करेगी। इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि निर्भया योजना के अंतर्गत सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और चंडीगढ़ में डीएनए एक्सलेंस लेबोरेटरी की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि डीएनए प्रोफाइल जैसे फॉरेंसिक साइंसिस के श्रेष्ठ उपयोग के कारण ही मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में बलात्कारियों को पांच-सात दिन के अल्पकाल में ही अदालतों ने फांसी की सजा सुना दी है।

न्यायिक प्रणाली में आयी तेजी और अपराधियों ने चाहे कैसा भी अपराध किया हो, इसके बावजूद अल्पकाल में ही उस अपराध का निराकरण हो जाए, अपराधियों को बचने का अवसर ना मिले और अपराधियों का खुलासा हो जाए, यही समाज की बड़ी सेवा है। इस क्षेत्र में केन्द्र सरकार और फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी साथ मिलकर कार्य कर रही है।

गुजरात की फॉरेंसिक साइंसिस युनिवर्सिटी को अपग्रेड करने की मंजूरी केन्द्र सरकार ए प्रदान कर दी है। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट के अंतर्गत फॉरेंसिक साइंसिस युनिवर्सिटी को 300 करोड़ रुपए खर्च कर अपग्रेड किया जाएगा और इसे सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बनाया जाएगा। इसमें 60 फीसदी राशि केन्द्र सरकार खर्च करेगी। गुजरात सरकार ने इसके लिए 50 करोड़ रुपए आवंटित भी कर दिए हैं।

डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युनिवर्सिटी के क्लासरूम की शिक्षा जिन्दगी के वर्गखंड में भी सहायक बनेगी। विवेकानन्दजी के उपदेश को दोहराते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आप में- स्वशक्ति में विश्वास रखने का अनुरोध किया। उन्होंने विद्यार्थियों को नये विचारों और नये मंतव्यों को स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहने का अनुरोध करते हुए कहा कि विश्व लगातार परिवर्तनशील है। हर क्षण विभिन्न आविष्कार हो रहे हैं ऐसे में, नये विचार तेजी से पुराने हो जाते हैं। विद्यार्थियों को विकास के लिए परिवर्तन का केन्द्र बनने की शुभकामनाएं देते हुए श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा और कुशाग्रता द्वारा ‘आउट ऑफ दि बॉक्स’ विचारकर सफल बनें। उन्होंने गोल्ड मैडल विजेता बेटियों को खास तौर पर बधाई दी।

गुजरात फॉरेंसिक साइंसिस युनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल श्री जे.एम. व्यास ने स्वागत सम्बोधन में कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2011 में इस युनिवर्सिटी की नींव रखी थी जो आज वटवृक्ष बन गई है। आज गुजरात फॉरेंसिक साइंसिस युनिवर्सिटी गांधीनगर वैश्विक स्तर की युनिवर्सिटी बन गई है।

श्री व्यास ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस युनिवर्सिटी में पांच पाठ्यक्रमों से शुरुआत हुई थी लेकिन आज इसमें 35 जितने पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। गुणवत्तायुक्त शिक्षा को प्राथमिकता देकर इस युनिवर्सिटी ने विश्व स्तर पर नाम कमाया है। इसके चलते देश- विदेश तथा विभिन्न राज्यों की अपराध संशोधन संस्थाओं के नमूना परीक्षण के लिए, पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने जैसे भगीरथ कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि संशोधन, शिक्षा, तालीम और कंसल्टंसी सहित चार क्षेत्रों पर खास ध्यान केन्द्रित किया गया है। युनिवर्सिटी में एशिया के सर्वप्रथम बैलेस्टिक रिसर्च सेंटर की भी स्थापना की गई है।

गुजरात फॉरेंसिक साइंसिस युनिवर्सिटी के इस चौथे दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा, राज्यपाल श्री ओपी कोहली और मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणीसहित महानुभावों की उपस्थिति में युनिवर्सिटी के कुल 512 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। साथ ही, पांच विद्यार्थियों को पी.एच.डी. की डिग्री प्रदान की गई। इन विद्यार्थियों में से प्रथम क्रमांक पर आने वाले 40 विद्यर्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

प्रधानमंत्री ने युनिवर्सिटी के एशिया के प्रथम बैलेस्टिक रिसर्च सेंटर का यहां शुभारम्भ भी किया। आर्म्ड व्हिकल बुलेटप्रूफ है या नहीं, किसी भी वाहन, जेकेट, हेलमेट, ग्लासप्लेट और मेटल प्लेट के बुलेट प्रूफिंग की यहां जांच हो सकेगी। इस सेंटर में देश- विदेश की कम्पनियां अपने उत्पादों की जांच के लिए आएंगी। साथ ही, सायबर सॉफ्टवेर या हार्डवेर की खामियां खोजकर उसका निराकरण करने वाले देश के प्रथम सायबर डिफेंस सेंटर का भी पीएम ने उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री नितिनभाई पटेल, शिक्षा मंत्री श्री भुपेन्द्रसिंह चूड़ास्मा, गृह राज्य मंत्री श्री प्रदीपसिंह जाड़ेजा, युनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ डिरेक्टर्स, हाईकोर्ट के न्यायाधीश, विभिन्न देशों के डेलिगेट्स, विषय विशेषज्ञों सहित युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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