पानी की संभावित परिस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने बुलाई समीक्षा बैठक

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पानी की संभावित परिस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने बुलाई समीक्षा बैठक

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अंतिम व्यक्ति तक पेयजल पहुंचाने को राज्य सरकार ने की पूर्व व्यवस्थाः मुख्यमंत्री    
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  • नर्मदा योजना में पानी की ५० फीसदी से कम आमद के बावजूद पेयजल के लिए राज्य सरकार का भगीरथ पुरुषार्थ
  • नर्मदा जल के विकल्प के रूप में २०६ करोड़ के खर्च से शुरू किए गए ३२ कार्यों की प्रगति की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा
  • आगामी मानसून तक सौराष्ट्र और कच्छ के जलाशयों के पानी के भंडार को पेयजल के लिए आरक्षित रखने का मुख्यमंत्री का निर्देशः जिला स्तर पर हर सप्ताह होगी पानी समिति की बैठक
  • आदिवासी क्षेत्रों में हैंडपंप मरम्मत की अतिरिक्त टीमें कार्यरत की जाएंगीः मरम्मत का अधिकार जिला कलक्टर कोः अगरियाओं के लिए पेयजल की विशेष व्यवस्था
  • राज्य सरकार की ३१ जुलाई तक की पूर्व व्यवस्थाः राज्य के १४०० गांव एवं ३२ शहरों को वैकल्पिक योजना द्वारा मिलेगा पेयजल

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मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने आगामी गर्मी के दिनों में भी पानी की किल्लत न हो इसके लिए पूर्व प्रबंध करते हुए प्रारंभ में मंजूर किए गए ताकीद के २०६ करोड़ रुपए के ३२ कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

पानी की संभावित परिस्थिति का सामना करने के लिए किए गए आयोजन के संदर्भ में रविवार को बुलाई गई उच्च अधिकारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अंतिम छोर के व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के कार्य को हमेशा प्राथमिकता दी है। इसलिए ही इस वर्ष में नर्मदा बांध में ५० फीसदी से भी कम पानी भरा होने के बावजूद राज्य सरकार ने पूर्व व्यवस्था कर ३१ जुलाई तक खड़ी होने वाली पानी की मांग को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया है।

मुख्यमंत्री ने इस समीक्षा बैठक में राज्य के सौराष्ट्र एवं कच्छ क्षेत्र के जलाशयों में आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए पेयजल के लिए जुलाई-२०१८ तक का पानी का भंडार आरक्षित रखने का निर्देश भी दिया।

राज्य में वर्तमान में नर्मदा आधारित योजनाओं से ८,६३९ गांवों तथा १६५ शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। ऐसे में, रबी सीजन के लिए सिंचाई का पानी देने के बाद स्थानीय जलस्रोतों में उपलब्ध पानी का पेयजल के रूप में सुचारु उपयोग करने की बात उन्होंने कही।

राज्य सरकार द्वारा पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए आगामी १५ मार्च से नर्मदा नहर में सिर्फ पीने के पानी का वहन करना तय किया गया है। ऐसे में, इस समय के बाद मुख्य नहर तथा सौराष्ट्र शाखा नहर में ही पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। जबकि अन्य शाखा नहरें बंद रखी जाएंगी। इसलिए मुख्यमंत्री ने जिन गांवों तथा शहरों में नर्मदा का पानी ना पहुंच सके, वहां वैकल्पिक व्यवस्था युद्धस्तर पर कर पानी पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके लिए राज्य सरकार ने पहले ही २०६ करोड़ रुपए के जिन ३२ कार्यों को मंजूरी दी थी, उन सभी कार्यों की वर्तमान स्थिति की प्रगति की समीक्षा कर मुख्यमंत्री ने इन कार्यों को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार की इस पूर्व व्यवस्था से १,४०० से अधिक गांवों और ३२ शहरों को वैकल्पिक व्यवस्था द्वारा गर्मियों के दिनों में भी पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। इन कार्यों के जरिए सौराष्ट्र के जिन जलाशयों में पेयजल का भंडार आरक्षित रखा जाता है, उसके अलावा सानी, वर्तु-२, घी, ओजत-२, ब्रामणी-१, ब्रामणी-२, फोदाळा बांध तथा कच्छ के फतेहगढ़, गोधतड़, मीट्ठी एवं सुवाई जैसे बांधों में से अतिरिक्त भंडार नर्मदा के विकल्प के रूप में देने की व्यवस्था की गई है।

इस समीक्षा बैठक में कच्छ जिले की जीवनरेखा समान टप्पर बांध तथा राजकोट जिले के आजी-१ बांध में आवश्यकतानुसार पानी का भंडारण करने के निर्णय की भी मुख्यमंत्री ने समीक्षा कर इन कार्यों की प्रगति की जानकारी हासिल की। श्री रूपाणी ने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं सभी जिला कलक्टरों को हर सप्ताह पेयजल की स्थिति की समीक्षा करने का भी निर्देश दिया।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सुरेन्द्रनगर जिले तथा तटीय इलाकों के अगरियाओं को पानी की तंगी न हो, इसके लिए अधिक टैंकरों के जरिए पानी मुहैया कराने की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने आवश्यक हो ऐसे क्षेत्रों में नए पाताल कुएं और हैंड पंप बोर करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने सौराष्ट्र एवं कच्छ की नगरपालिकाओं द्वारा पेयजल के सुचारु दैनिक वितरण की व्यवस्था के लिए शहरी विकास विभाग को दीर्घकालिक प्रबंध के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं लेकर योजना बनाने का भी निर्देश दिया।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने कहा कि राज्य के दक्षिण एवं मध्य क्षेत्र के जिलों वलसाड़, डांग, नवसारी, तापी, सूरत, नर्मदा, छोटा उदेपुर, दाहोद, महीसागर, पंचमहाल, वड़ोदरा, खेड़ा और आणंद जिले में पेयजल के पर्याप्त स्रोत हैं। इन जिलों में जरूरत पड़ने पर टैंकर के जरिए पानी सुलभ कराने की व्यवस्था की गई है। जनजातीय क्षेत्रों में हैंड पंप की मरम्मत करने के लिए पर्याप्त संख्या में मरम्मत टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, साबरकांठा जिले के २८० गांव फतेपुर एवं खेड़ तालाब पर आधारित हैं। अधिकारियों ने कहा कि नर्मदा मुख्य नहर से पाइपलाइन के मार्फत इन तालाबों को पेयजल के लिए भरने का निर्णय किया गया है।

राज्य सरकार ने संभावित परिस्थिति का सामना करने के लिए २०६ करोड़ के ताकीद के जिन कार्यों का आयोजन किया है, उसमें प्रगति में चल रहे कार्यों में मुख्यतः अहमदाबाद जिले के लिए करीब २२.४० करोड़, देवभूमि द्वारका के लिए करीब ४४.५० करोड़, कच्छ के लिए करीब ४१.३२ करोड़, मोरबी के लिए करीब २०.६६ करोड़, भावनगर के लिए करीब २६.२० करोड़, सुरेन्द्रनगर के लिए करीब १७.८० करोड़, जूनागढ़ के लिए करीब १४.२० करोड़, राजकोट के लिए करीब ९.५० करोड़ रुपए तथा पाटण-बनासकांठा जिले के लिए ७.३४ करोड़ रुपए के कार्यों का समावेश होता है।

प्रगति में चल रहे इन सभी कार्यों की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। इसमें अहमदाबाद जिले के वीरमगाम, देत्रोज एवं मांडल तहसील के १२६ गांवों को झिंझुवाड़ा शाखा नहर के प्रथम पुल में उपलब्ध पानी का उपयोग करने लगभग १६ करोड़ के कार्य, देवभूमि द्वारका जिले में खंभाळिया एवं कल्याणपुर तहसील के कुल १६ गांवों के लिए ७.६९ करोड़ के घी जलाशय मुख्य पाइपलाइन के कार्य, खंभाळिया तहसील के ८० एवं लालपुर तहसील के ३९ गांवों तथा तीन शहरों के लिए पांचदेवड़ा तालाब की मुख्य पाइपलाइन के १.१४ करोड़ के कार्य तथा कल्याणपुर एवं ओखा मंडल के ९९ गांव एवं तीन शहरों के लिए सानी बांध से १७ किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के लिए ३२.४० करोड़ रुपए के कार्यों का समावेश होता है।

इसके अलावा, जूनागढ़ जिले के माणावदर शहर तथा माणावदर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बांटवा खर बांध से १० किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के लगभग २.७१ करोड़ के कार्य तथा ओजत-२ बांध से पाइपलाइन के लिए २.४० करोड़ के कार्य किए जाएंगे तथा पोरबंदर जिले के गांवों के लिए फोदरा बांध की पाइपलाइन का १.६५ करोड़ रुपए का कार्य भी शुरू किया जाएगा।

राजकोट जिले के भादर-१ बांध से अमरनगर हेडवर्क्स तक १४.५० किमी लंबी पाइपलाइन योजना के ९.५० करोड़ के कार्य का समावेश होता है।

मोरबी एवं सुरेन्द्रनगर के लिए ब्राह्मणी-२ बांध आधारित पाइपलाइन द्वारा हळवद एवं मूळी तहसील के कुल ७९ गांव एवं एक शहर के लिए २०.६६ करोड़ जबकि नायका बांध आधारित सुरेन्द्रनगर जिले के २३ गांवों के लिए २ किमी. लंबी पाइपलाइन का १.३२ करोड़ के कार्य एवं लींबड़ी शहर तथा १४ गांवों के लिए वड़ोद बांध आधारित पाइपलाइन के १.५६ करोड़ के कार्य जबकि सुरेन्द्रनगर जिले के ५७ गांवों एवं ध्रांगध्रा शहर के लिए ४.२५ किमी लंबी पाइपलाइन के लिए ८.२७ करोड़ तथा धोळीधजा बांध में नवीन पंपिंग मशीनरी के लिए २.३५ करोड़ रुपयों के माध्यम से सुरेन्द्रनगर जिले के सायला, चोटिला, थानगढ़, मूळी एवं वांकानेर तहसील के कुल ३२४ गांव एवं दो शहरों को जलापूर्ति की जा सकेगी।

कच्छ जिले के फतेगढ़ बांध से २ किमी पाइपलाइन के लिए ४.१७ करोड़ रुपए के कार्य से रापर तहसील के ५७ गांवों को लाभ मिलेगा। वहीं, गोधातळ बांध आधारित पाइपलाइन के २.०२ करोड़ रुपए के कार्य से २१ गांवों को फायदा होगा। इसी तरह, अबडासा तहसील के २७ गांवों के लिए मिट्टी बांध से २३ किमी पाइपलाइन के कार्य के लिए १६.७४ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे जबकि सुवई बांध की १३.३२ किमी लंबी पाइपलाइन की ७.४१ करोड़ रुपए की योजना तथा कच्छ जिले के ८ गांवों के लिए गजनसर बांध से ६.५० किमी लंबी पाइपलाइन १.४८ करोड़ रुपए के खर्च से बिछाई जाएगी। इसके अलावा, भावनगर जिले में १६२ गांव तथा २ शहरों को जलापूर्ति के लिए वल्लभीपुर बुधेल बल्क पाइपलाइन के लिए २६.१८ करोड़ रुपए खर्च होंगे।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सिंचाई एवं जलापूर्ति राज्यमंत्री परबतभाई पटेल, मुख्य सचिव डॉ. जेएन सिंह, गृह एवं नर्मदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एमएस डागुर, शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव मुकेश पुरी, जलापूर्ति प्रभाग के प्रधान सचिव जेपी गुप्ता, जल संसाधन सचिव एमके जादव तथा अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

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