पवित्रता, दिव्यता और नैतिकता की वाहक है गुजरात की भूमिः राष्ट्रपति

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पवित्रता, दिव्यता और नैतिकता की वाहक है गुजरात की भूमिः राष्ट्रपति

Kovind

गोंडल स्थित विश्वविख्यात अक्षर देरी के सार्ध शताब्दी महोत्सव में राष्ट्रपति ने कहा कि बोचासणवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बैप्स) मानवता की सेवा का भगीरथ कार्य कर रही है। गुणातीत स्वामी ने तो उस दौर में सेवा की मशाल लेकर जात-पात और ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर जनकल्याण का जो यज्ञ शुरू किया था, वह आज भी जारी है। देश-विदेश में कार्यरत संस्था के ५५ हजार स्वयंसेवक जनकल्याण की फौज हैं।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल श्री ओ.पी. कोहली, मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी, उप मुख्यमंत्री श्री नितिनभाई पटेल ने भी सहभागी बनकर सेवा, पवित्रता और आध्यात्मिकता के नाद को बुलंद बनाया।
अक्षर देरी के सार्ध शताब्दी महोत्सव के अवसर पर ११ दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में सोमवार को अक्षर मंदिर के पीछे २०० एकड़ क्षेत्र में खड़े किए गए श्री स्वामीनारायण नगर में आयोजित सभा में बतौर मुख्य अतिथि संबोधन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि गोंडल की अक्षर देरी के दर्शन का यह दूसरा अवसर है। इससे पूर्व बिहार के राज्यपाल के तौर पर दर्शन का लाभ मिला था और इस पुण्यभूमि के कारण थोड़े ही दिनों के बाद राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी मिली।
श्री कोविंद ने कहा कि बैप्स संस्था ने मानवता के कल्याण के लिए आध्यात्मिकता को बुनियाद बनाया है और सेवा की सुगंध को देश-विदेश में फैलाया है। संस्था की निस्वार्थ और परमार्थ सेवा के प्रशंसक पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम भी थे। स्व. कलाम के प्रमुख स्वामी के साथ संस्मरणों की झलक आज भी राष्ट्रपति भवन में नजर आती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात में व्यवहारिकता और आध्यामिकता का सुखद समन्वय देखने को मिलता है। गांधी जी के प्रिय भजन ‘वैष्णवजन तो…’ की रचना की प्रेरणा भी यहीं से मिली थी। सरदार पटेल और मोरारजी देसाई जैसे प्रबल सेवकों की प्रेरणाभूमि गुजरात रही है। पवित्रता, दिव्यता और नैतिकता की वाहक यह भूमि और संस्था रही है।



उन्होंने कहा कि बोचासणवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था द्वारा पवित्रता, दिव्यता और नैतिकता द्वारा चरित्र निर्माण और उसके जरिए परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का कार्य हो रहा है। मानवता के कल्याण का महाकार्य हो रहा है। उन्होंने स्वामीनारायण मंदिरों में स्वच्छता को लेकर संस्था की तारीफ की।
मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने अक्षर देरी महोत्सव में दिखाई पड़ रही साधुता की महक का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां बना राष्ट्र, राज्य और धर्म सत्ता का त्रिवेणी संगम समग्र राज्य के लिए चिरस्मरणीय रहेगा।
श्री रूपाणी ने आशा व्यक्त की कि इस महोत्सव से गुजरात की आध्यात्मिक क्षमता बुलंद होगी। उन्होंने स्वामीनारायण संस्था की सेवा प्रवृत्तियों की सराहना की और अक्षर देरी के इतिहास का जिक्र कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। अक्षर देरी के निर्माण के १५०वें वर्ष पर संस्था ने धर्म के क्षेत्र में मिसाल कायम की है, जिससे गुजरात धन्य हुआ है। इस अवसर पर राष्ट्रपति की उपस्थिति के लिए मुख्यमंत्री ने उनका आभार जताया।
पू. महंत स्वामी ने आशीर्वचन में सभी महानुभावों का आभार व्यक्त करते हुए श्री कोविंद के दूसरी बार अक्षर देरी आने पर उनका विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रमुख स्वामी महाराज के आशीर्वाद से गुजरात में सभी लोगों को अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिल रही है। महंत स्वामी ने अक्षर देरी का महत्व बताते हुए पू. गुणातीतानंद स्वामी के समाजोन्मुख कार्यों का भी संस्मरण किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में बैप्स संस्था के प्रमुख पू. महंत स्वामी ने महामहिम राष्ट्रपति तथा अन्य मेहमानों का पुष्पहार और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
स्वामी श्री ब्रह्मविहारी ने स्वागत भाषण दिया और श्री अक्षर देरी सार्ध शताब्दी महोत्सव के ११ दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
स्वामी श्री आनंद स्वरूपजी ने बैप्स संस्था की विकास प्रवृत्तियों का ब्यौरा देते हुए कहा कि पवित्र और नैतिक जीवन के लिए कटिबद्ध यह संस्था एक विश्वव्यापी आध्यात्मिक समाज है। जीवन का सच्चा मर्म समझाने वाली और शाश्वत शांति की ओर ले जाने वाली इस धर्म संस्था का लक्ष्य मानव मात्र का उत्कर्ष है। भगवान स्वामीनारायण प्रबोधित वैदिक आदर्शों को केन्द्र में रखकर ब्रह्मस्वरूप शास्त्री महाराज ने वर्ष १९०७ में संस्था की स्थापना की थी। देश-विदेश में करीब १३०० मंदिरों का निर्माण कर संस्था ने संस्कार प्रवृत्ति और मानव सेवा की ज्योत प्रज्वलित की है। प्रकट ब्रह्मस्वरूप महंत स्वामीमहाराज की निश्रा में सनातन संस्कृति को जनमानस में बढ़ावा देने वाली इस संस्था ने विश्वस्तर पर लोकहृदय में अनूठा स्थान बनाया है। कार्यक्रम के अंत में संस्था के प्रमुख महंत स्वामी जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह चूड़ास्मा, संतगण श्री विवेकसागर स्वामी, श्री आनंदस्वरूप स्वामी और श्री भक्तिप्रिय स्वामी सहित भक्तगण और बड़ी संख्या में अनुयायी उपस्थित थे।

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